F aarti jai ganesh jai ganesh jai ganesh devaजय गणेश देवा आरती - bhagwat kathanak
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परिचय aarti jai ganesh jai ganesh jai ganesh deva

भगवान गणेश, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है, उनकी आराधना बिना किसी शुभ कार्य की शुरुआत अधूरी मानी जाती है। 'जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा' उनकी सबसे प्रसिद्ध और सरल आरती है, जिसे भक्ति भाव से गाने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। प्रस्तुत है इस आरती के शुद्ध हिंदी और अंग्रेजी लिरिक्स, जिन्हें आप आसानी से अपनी वेबसाइट या ब्लॉग पर प्रकाशित कर सकते हैं।

श्री गणेश जी की आरती: हिंदी लिरिक्स

यह आरती भगवान गणेश के स्वरूप, उनकी कृपा और दिव्य गुणों का वर्णन करती है, और इसे प्रत्येक पूजा अनुष्ठान की शुरुआत में गाया जाता है। aarti jai ganesh jai ganesh jai ganesh deva

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

पान चढ़े, फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
(यह दोहा कुछ संस्करणों में शामिल है)

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी।।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
(यह पंक्तियाँ कुछ संस्करणों में अतिरिक्त मिलती हैं)

Ganesh Aarti Lyrics in English

Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva।
Mata Jaki Parvati, Pita Mahadeva॥

Ekadanta Dayavanta, Char Bhujadhaari।
Mathe Sindoor Sohe, Muse Ki Sawari॥
Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva।
Mata Jaki Parvati, Pita Mahadeva॥

Paan Chadhe, Phal Chadhe, Aur Chadhe Mewa।
Ladduan Ka Bhog Lage, Sant Karein Seva॥
Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva।
Mata Jaki Parvati, Pita Mahadeva॥

Andhan Ko Aankh Det, Kodhin Ko Kaya।
Banjhan Ko Putra Det, Nirdhan Ko Maya॥
Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva।
Mata Jaki Parvati, Pita Mahadeva॥

आरती का अर्थ और भावार्थ aarti jai ganesh jai ganesh jai ganesh deva

इस आरती की प्रत्येक पंक्ति में भगवान गणेश की महिमा और उनकी असीम कृपा का वर्णन है

आरती पंक्ति (हिंदी)अर्थ (भावार्थ)
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।हे भगवान गणेश, आपकी जय हो! आप माता पार्वती और पिता महादेव शिव के पुत्र हैं।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।।आप एक दाँत वाले, दयालु, चार भुजाओं वाले हैं। आपके माथे पर सिंदूर सुशोभित है और मूषक (मूसा) आपकी सवारी है।
पान चढ़े, फल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।।आपको पान, फल, सूखे मेवे और लड्डुओं का भोग लगाया जाता है, और संत-महात्मा आपकी सेवा करते हैं।
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।।आप अंधे को आँखें, कोढ़ी को स्वस्थ शरीर, बाँझ स्त्री को पुत्र और निर्धन को धन-संपत्ति प्रदान करते हैं।

गणेश आरती का महत्व और लाभ aarti jai ganesh jai ganesh jai ganesh deva

'जय गणेश जय गणेश देवा' आरती का नियमित रूप से पाठ करने से कई आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं:

  • सभी बाधाओं का नाश: भगवान गणेश को 'विघ्नहर्ता' कहा गया है। इस आरती के जाप से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं
  • बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि: गणेश जी बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं। इनकी आरती से मानसिक शक्ति और विवेक का विकास होता है
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: आरती को सच्चे भाव से गाने से वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है और नकारात्मकता समाप्त होती है।
  • सुख-समृद्धि में वृद्धि: गणेश जी की कृपा से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है
  • पूजा को पूर्णता: किसी भी देवी-देवता की पूजा से पहले गणेश जी की आरती करना शुभ माना जाता है, जिससे सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

आरती कब और कैसे करें

सामान्यतः यह आरती गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, बुधवार और किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में की जाती है। गणेश जी को लाल रंग के फूल, दुर्वा (तीन पत्तों वाली घास), और मोदक या लड्डू विशेष रूप से प्रिय हैं। आरती के समय घी का दीपक जलाना और तांबे या पीतल के दीपक का उपयोग करना शुभ माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न aarti jai ganesh jai ganesh jai ganesh deva

Q: गणेश जी की यह आरती किसने लिखी है?
A: इस आरती की रचना सदियों पहले लोक परंपरा (Folk Tradition) के तहत अज्ञात कवियों द्वारा की गई थी। इसका सरल और मधुर ढांचा सभी के लिए सुलभ है

Q: क्या इस आरती के गायन का कोई विशेष समय है?
A: हालाँकि इस आरती को किसी भी समय गाया जा सकता है, लेकिन संध्या काल (शाम के समय) दैनिक पूजा और गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों के दौरान इसे गाना अत्यधिक शुभ माना जाता है

Q: गणेश जी का प्रिय भोग क्या है?
A: गणेश जी को मोदक (मीठी पकौड़ी) और लड्डू (बेसन के गोले) अत्यंत प्रिय हैं, इसीलिए आरती में "लड्डुअन का भोग लगे" का उल्लेख आता है

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निष्कर्ष

'जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा' केवल एक आरती नहीं है, बल्कि यह असीम श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। इसके माध्यम से हम विघ्नहर्ता से अपने जीवन से सभी कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। इसके शुद्ध लिरिक्स और गहन अर्थ को समझकर, आप भी इस दिव्य आरती से लाभान्वित हो सकते हैं।

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