bhaye pragat kripala lyrics दिव्य स्तुति: भये प्रकट कृपाला
🚩 प्रस्तावना: जानिए भगवान श्रीराम के जन्म की इस अद्भुत स्तुति का महत्व bhaye pragat kripala lyrics
भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव या रामनवमी के अवसर पर "भये प्रकट कृपाला" का गायन अत्यंत शुभ और लोकप्रिय है। यह स्तुति गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ के बालकांड से ली गई है। यह पद उस दिव्य क्षण का वर्णन करता है, जब माता कौशल्या को भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप के दर्शन हुए और फिर उनकी प्रार्थना पर वे एक सामान्य बालक के रूप में प्रकट हुए। यह भजन न केवल भक्ति और करुणा का प्रतीक है, बल्कि विश्व में श्रीराम के प्रकट होने की लीला का सुंदर चित्रण भी है। आइए जानते हैं इस भजन के बोल।
📜 1. हिंदी (देवनागरी) लिरिक्स – मूल अवधी भाषा में
नोट: यह मूल रूप से अवधी भाषा में तुलसीदास जी द्वारा लिखी गई थी। कृपया वर्तनी में मूल लिपि का ध्यान रखें।
छंद: bhaye pragat kripala lyrics
भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी॥लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज आयुध भुजचारी।
भूषन बनमाला, नयन बिसाला, सोभासिंधु खरारी॥कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी, केहि बिधि करूं अनंता।
माया गुन ग्यानातीत अमाना, वेद पुरान भनंता॥करुना सुख सागर, सब गुन आगर, जेहि गावहिं श्रुति संता।
सो मम हित लागी, जन अनुरागी, भयउ प्रगट श्रीकंता॥ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया, रोम रोम प्रति बेद कहै।
मम उर सो बासी, यह उपहासी, सुनत धीर मति थिर न रहै॥उपजा जब ग्याना, प्रभु मुसुकाना, चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।
कहि कथा सुहाई, मातु बुझाई, जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै॥माता पुनि बोली, सो मति डोली, तजहु तात यह रूपा।
कीजै सिसुलीला, अति प्रियसीला, यह सुख परम अनूपा॥सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना, होइ बालक सुरभूपा।
यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं, ते न परहिं भवकूपा॥
दोहा: bhaye pragat kripala lyrics
बिप्र धेनु सुर संत हित, लीन्ह मनुज अवतार।
निज इच्छा निर्मित तनु, माया गुन गो पार॥
(इस दोहे का भावार्थ है: ब्राह्मण, गाय, देवता और संतों के कल्याण के लिए भगवान ने मनुष्य रूप धारण किया। उनका शरीर आत्म-इच्छा से निर्मित है, वे माया के गुणों से परे हैं।)
🖋️ 2. अंग्रेज़ी (Roman/Latin) लिपि – उच्चारण हेतु
यदि आप सही उच्चारण के साथ यह भजन समझना या गाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए रोमन लिपि (हिंदी उच्चारण के अनुसार) का उपयोग करें।
Chhand (Verses): bhaye pragat kripala lyrics
Bhaye pragat kripala, deen dayala, Kausalya hitkari।
Harshit mahatari, muni man haari, adbhut roop bichari॥Lochan abhirama, tanu ghanshyama, nij aayudha bhujchari।
Bhushan banamala, nayan bisaala, shobhasindhu kharari॥Kah dui kar jori, astuti tori, kehi bidhi karun ananta।
Maya gun gyanateet amana, ved puran bhananta॥Karuna sukh sagar, sab gun aagar, jehi gavahin shruti santa।
So mam hit laagi, jan anuragi, bhayao pragat shrikanta॥Brahmand nikaya, nirmit maya, rom rom prati bed kahe।
Mam ur so basi, yah upahasi, sunat dheer mati thir na rahe॥Upja jab gyana, prabhu musukana, charit bahut bidhi keenh chahe।
Kahi katha suhai, matu bujhai, jehi prakar sut prem lahai॥Mata puni boli, so mati doli, tajahu taat yah roopa।
Keejai sisuleela, ati priyaseela, yah sukh param anoopa॥Suni vachan sujana, rodan thana, hoi baalak surabhoopa।
Yah charit je gavahin, haripad pavahin, te na parahin bhavakoopa॥
Doha: bhaye pragat kripala lyrics
Bipra dhenu sur sant hit, leenh manuj avataar।
Nij ichha nirmit tanu, maya gun go paari॥
📖 3. शब्दार्थ और सरल व्याख्या bhaye pragat kripala lyrics
इस भजन के शुरुआती शब्दों का अर्थ है "प्रकट हो गए वो दयालु, दीनों पर दया करने वाले"।
- भए प्रगट कृपाला (Bhaye Pragat Kripala): भगवान श्रीराम कृपा के सागर हैं। इस पंक्ति का अर्थ है कि स्वयं भगवान विष्णु (श्रीहरी) माता कौसल्या के सामने आकर प्रकट हो गए।
- दीनदयाला (Deen Dayala): दीन-दुखियों (पीड़ितों) पर दया करने वाला।
- लोचन अभिरामा (Lochan Abhirama): उनके नेत्र अत्यंत मनोहर और सुंदर हैं।
- तनु घनस्यामा (Tanu Ghanshyama): उनका शरीर घने बादल के समान श्याम वर्ण है।
- करुना सुख सागर (Karuna Sukh Sagar): वे करुणा और सुख के समुद्र हैं।
🙏 प्रश्नोत्तर (FAQ): सामान्य जिज्ञासा bhaye pragat kripala lyrics
प्रश्न 1: यह भजन किसने लिखा है?
गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसे ‘रामचरितमानस’ के बालकांड में लिखा था।
प्रश्न 2: मैं सही उच्चारण कैसे करूं?
ऊपर दिए गए अंग्रेज़ी (Roman) अक्षरों का पालन करें। ‘भये’ को ‘Bhaye’ उच्चारित करें (Bhay + eh), ‘प्रगट’ को Pragat।
प्रश्न 3: इस भजन का भावार्थ क्या है?
यह माता कौशल्या द्वारा भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप के दर्शन और फिर शिशु राम के रूप में उनकी शरणागति का मधुर वर्णन है।
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यह स्तुति जीवन के हर दुख को दूर करने वाली मानी जाती है। इसके नियमित पाठ से मन को शांति और घर में सुख-समृद्धि आती है।
