F भारत के टॉप 20 भागवत कथा वाचक: आध्यात्मिक ज्ञान के ध्वजवाहक - bhagwat kathanak
भारत के टॉप 20 भागवत कथा वाचक: आध्यात्मिक ज्ञान के ध्वजवाहक

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भारत के टॉप 20 भागवत कथा वाचक: आध्यात्मिक ज्ञान के ध्वजवाहक

भारत के टॉप 20 भागवत कथा वाचक: आध्यात्मिक ज्ञान के ध्वजवाहक

 भारत के टॉप 20 भागवत कथा वाचक: आध्यात्मिक ज्ञान के ध्वजवाहक

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Meta Description: भारत के 20 प्रसिद्ध भागवत कथा वाचकों की सूची। जानें इन आध्यात्मिक गुरुओं की विशेषताएं, उनके प्रवचन शैली और कथा वाचन की परंपरा के बारे में।

भागवत कथा: एक जीवंत परंपरा

भारत की धरती पर आध्यात्मिकता की जड़ें इतनी गहरी हैं कि यहाँ हर युग में कोई न कोई दिव्य आत्मा उतरती रही है। श्रीमद् भागवत महापुराण, जिसे वेदों का परिपक्व फल कहा जाता है, सिर्फ एक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। इस ग्रंथ को जन-जन तक पहुँचाने वाले कथा वाचकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे न केवल शास्त्रों का ज्ञान बाँटते हैं, बल्कि आधुनिक जीवन की उलझनों में फँसे लोगों को एक नया दृष्टिकोण देते हैं।
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भागवत कथा वाचन की परंपरा सदियों पुरानी है। पहले यह काम मुख्य रूप से पुरुष संतों और आचार्यों द्वारा किया जाता था, लेकिन आज की तारीख में महिला कथा वाचक भी इस क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। यह लेख उन 20 प्रतिभाशाली कथा वाचकों पर प्रकाश डालता है जिन्होंने अपनी साधना, ज्ञान और वाणी से लाखों-करोड़ों लोगों का मार्गदर्शन किया है।
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टॉप 20 भागवत कथा वाचक: परिचय और विशेषताएं

1. मुरारी बापू

गुजरात के तालगजरदा गाँव में जन्मे मुरारी बापू का नाम भारतीय आध्यात्मिक जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। उनका जन्म 2 मार्च 1946 को हुआ था और वे निम्बार्क सम्प्रदाय से जुड़े हुए हैं। मुरारी बापू ने पिछले 60 वर्षों में 900 से अधिक राम कथाओं का वाचन किया है, जो अपने आप में एक अभूतपूर्व उपलब्धि है। उनकी कथा शैली में रामचरितमानस की गहरी समझ झलकती है। वे गुजरात में गुजराती भाषा में और बाकी भारत तथा विदेशों में हिंदी में कथा वाचन करते हैं। उनकी सबसे बड़ी कथा नाथद्वारा, राजस्थान में हुई जहाँ 9 दिनों में 12 लाख से अधिक श्रोता एकत्रित हुए थे। उनकी कथाएँ आस्था टीवी पर प्रसारित होती हैं।

2. देवकीनंदन ठाकुर जी

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के ओहावा गाँव में 12 सितंबर 1978 को जन्मे देवकीनंदन ठाकुर जी निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रसिद्ध कथा वाचक हैं। उन्होंने मात्र 13 वर्ष की आयु तक भागवत पुराण को कंठस्थ कर लिया था। उनकी कथा शैली में भक्ति-कीर्तन का विशेष महत्व है। वे भारत के साथ-साथ अमेरिका और अन्य देशों में भी भागवत कथा का प्रवचन करते हैं। उनका वैश्विक प्रभाव आज की पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्रोत है।

3. आचार्य शिवम मिश्रा जी महाराज

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मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से जुड़े आचार्य शिवम मिश्रा जी महाराज (संकर्षण रामानुज दास) भागवत पुराण, शिव पुराण और श्री राम कथा के सरस प्रवक्ता हैं। वे केवल कथा वाचक ही नहीं, बल्कि एक प्रशिक्षक भी हैं जो नए कथा वाचकों को तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उनकी कथा शैली में शास्त्रीय गंभीरता के साथ-साथ जनसामान्य की भाषा में सरल प्रस्तुति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

उनके प्रवचनों में सच्ची भक्ति का संदेश प्रमुखता से उभरता है। वे श्रोताओं को ध्रुव और भक्त प्रह्लाद की कथा के माध्यम से यह समझाते हैं कि भक्ति करनी है तो दिखावा न करते हुए सच्चे हृदय से करनी चाहिए। उनका मानना है कि जब भक्ति सच्ची होती है, तो ईश्वरीय शक्ति अवश्य सहायता करती है। उन्होंने कुबेरेश्वरधाम सहित देश के कई प्रसिद्ध धामों पर कथा प्रवचन किया है, जहाँ उन्होंने ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद चरित्र और नरसिंह अवतार प्रसंग पर गहन चिंतन प्रस्तुत किया।
आचार्य शिवम मिश्रा जी महाराज की विशेषता यह है कि वे शास्त्रों के गूढ़ अर्थ को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाते हैं। उनकी वाणी में संस्कृत और संस्कृति दोनों की गहरी समझ झलकती है, जिससे श्रोता न केवल आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करते हैं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति से भी जुड़ाव महसूस करते हैं। उनकी कथाएँ यूट्यूब और अन्य डिजिटल माध्यमों पर भी उपलब्ध हैं, जिनसे दुनियाभर के भक्त उनके प्रवचनों का लाभ उठा रहे हैं।

4. जया किशोरी जी

जया किशोरी जी का जन्म 13 जुलाई 1995 को कोलकाता में एक गौड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनका असली नाम जया शर्मा है। मात्र 7 वर्ष की उम्र से उन्होंने सत्संग और भजन गायन शुरू किया। 10 वर्ष की आयु में सुंदरकांड गाकर उन्होंने लाखों भक्तों का मन मोह लिया। वे केवल कथा वाचक नहीं बल्कि प्रेरणादायक वक्ता, लेखिका और भजन गायिका भी हैं। उन्हें 8 मार्च 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा "राष्ट्रीय रचनाकार पुरस्कार" से सम्मानित किया गया। उनकी कथाएँ युवा पीढ़ी को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं क्योंकि वे प्राचीन शास्त्रों को आधुनिक जीवन से जोड़कर प्रस्तुत करती हैं।

5. अनिरुद्धाचार्य जी महाराज

वृंदावन से जुड़े अनिरुद्धाचार्य जी महाराज अपनी भावुक और संगीतमय कथा शैली के लिए प्रसिद्ध हैं। उनका प्रवचन शुद्ध भक्ति रस पर आधारित होता है। वे श्रीमद् भागवत कथा के साथ-साथ अन्य पुराणों का भी गहन अध्ययन करते हैं। उनकी कथाओं में भजनों और कीर्तनों का विशेष स्थान है, जो श्रोताओं को भाव-विभोर कर देता है। वे सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय हैं और उनके प्रवचन युवाओं में विशेष लोकप्रिय हैं।

6. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम सरकार)

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ा गाँव में 4 जुलाई 1996 को जन्मे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें बागेश्वर धाम सरकार के नाम से भी जाना जाता है, आज के युवाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं। वे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर हैं और रामचरितमानस, शिव पुराण और भागवत कथा का प्रवचन करते हैं। उन्होंने अपने धाम में अन्नपूर्णा रसोई की स्थापना की है जहाँ निःशुल्क भोजन प्रसाद की व्यवस्था होती है। साथ ही वे गरीब और बेसहारा लड़कियों के विवाह के लिए वार्षिक समारोह का आयोजन भी करते हैं। उनका वैदिक गुरुकुल प्राचीन संस्कृत और वैदिक अध्ययन को बढ़ावा दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2025 में उनके द्वारा प्रारंभ किए गए कैंसर अस्पताल की आधारशिला रखी।

7. प्रदीप मिश्रा जी (सीहोर वाले)

मध्य प्रदेश के सीहोर में जन्मे पंडित प्रदीप मिश्रा जी की कहानी संघर्ष और सफलता की एक प्रेरणादायक गाथा है। उनके पिता चाय की दुकान चलाते थे और प्रदीप जी खुद दुकान पर चाय देते थे। उनका जन्म घर के आंगन में तुलसी की क्यारी के पास हुआ क्योंकि अस्पताल में जन्म के बाद दाई को दिए जाने वाले पैसे उनके पास नहीं थे। उनके गुरु श्री विठलेश राय काका जी ने उन्हें पुराणों का ज्ञान दिया और आशीर्वाद दिया कि उनका पंडाल कभी खाली नहीं रहेगा। आज वे शिव महापुराण कथा के विश्वविख्यात वाचक हैं। उनकी कथा शैली में सरलता और भक्ति भाव की अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है।

8. इंद्रेश उपाध्याय जी

पंडित इंद्रेश उपाध्याय जी भक्तिपथ संस्था के संस्थापक हैं। वे पंडित कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुर जी के पुत्र हैं। उनका कथा वाचन श्रीमद् भागवत के गहन दार्शनिक पक्ष पर केंद्रित होता है। उनकी शैली में वैदिक ज्ञान और आधुनिक दृष्टिकोण का सुंदर संगम है। वे अपने प्रवचनों में प्रेम, सेवा और समर्पण के मूल्यों पर विशेष जोर देते हैं। उनकी कथाएँ भारत के साथ-साथ विदेशों में भी आयोजित होती हैं।

9. देवी चित्रलेखा जी

हरियाणा के पलवल जिले के खंबी गाँव में 19 जनवरी 1997 को जन्मी देवी चित्रलेखा जी भारत की सबसे युवा कथा वाचकों में से एक हैं। मात्र 4 वर्ष की उम्र में उन्हें श्री गिरधारी बाबा जी ने गौड़ीय वैष्णव परंपरा में दीक्षा दी। 6 वर्ष की उम्र में बरसाना में रमेश बाबा जी के कार्यक्रम में उन्होंने आधे घंटे तक प्रवचन देकर सबको चकित कर दिया था। उन्होंने वृंदावन के पास तपोवन में अपनी पहली सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया। वे "वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में सबसे युवा भागवत प्रवक्ता के रूप में दर्ज हैं। उन्होंने पलवल में गौ सेवा धाम अस्पताल की स्थापना की है।

10. देवी कृष्णप्रिया जी (साध्वी कृष्णप्रिया)

देवी कृष्णप्रिया जी आज की महिला कथा वाचकों में एक प्रमुख नाम हैं। वे श्रीमद् भागवत कथा, राम कथा और शिव महापुराण कथा का प्रवचन करती हैं। उनकी कथाओं में करुणा, गौ सेवा और निस्वार्थ सेवा का विशेष संदेश होता है। वे युवा पीढ़ी को आध्यात्म की ओर आकर्षित करने में सफल रही हैं। उनका प्रवचन शैली में शास्त्रीय ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का भी समावेश है। वे पशु अधिकारों और गौ संरक्षण के लिए सक्रिय रूप से कार्य करती हैं।

11. देवी भाग्यश्री जी

देवी भाग्यश्री जी एक प्रतिष्ठित महिला कथा वाचक हैं जो सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उनकी कथाएँ शास्त्रीय शिक्षाओं और व्यावहारिक जीवन के बीच एक सेतु का काम करती हैं। वे भागवत कथा के माध्यम से भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उनके प्रवचन में सरल भाषा और गहरा भाव होता है जो हर वर्ग के श्रोताओं को स्पर्श करता है।

12. दीप्ति जी

दीप्ति जी एक उभरती हुई महिला कथा वाचक हैं जो अपनी भक्तिपूर्ण प्रस्तुति से आध्यात्मिक जगत में अपनी पहचान बना रही हैं। उनकी कथाएँ भक्ति और आत्म-साक्षात्कार के मार्ग पर मार्गदर्शन करती हैं। वे श्रीमद् भागवत के माध्यम से जीवन में धैर्य, विश्वास और समर्पण के महत्व को समझाती हैं।

13. देवी अंजलि जी

देवी अंजलि जी राम कथा और भागवत कथा की प्राचीन शिक्षाओं को समर्पित एक प्रसिद्ध कथा वाचक हैं। उनका प्रवचन शैली में पारंपरिक ज्ञान और समकालीन संदेशों का सुंदर मिश्रण है। वे आध्यात्मिक कार्यक्रमों और कथा आयोजनों में नियमित रूप से भाग लेती हैं। उनकी कथाएँ श्रोताओं को आंतरिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करती हैं।

14. आचार्य शिवांश जी महाराज (दिल्ली)

दिल्ली से जुड़े आचार्य शिवांश जी महाराज भागवत कथा के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम हैं। उनका प्रवचन शैली में शास्त्रीय अध्ययन की गहराई और भक्ति भाव की मधुरता दोनों मौजूद हैं। वे नियमित रूप से विभिन्न शहरों में भागवत कथा का आयोजन करते हैं और श्रोताओं को श्री कृष्ण की लीलाओं से परिचित कराते हैं।

15. पंडित विजय शंकर तिवारी जी

पंडित विजय शंकर तिवारी जी एक प्रतिष्ठित कथा वाचक हैं जो भागवत पुराण के गहन अध्येता हैं। उनकी कथा शैली में श्लोक-पाठ और उनके अर्थ का विस्तृत विश्लेषण होता है। वे श्रोताओं को शास्त्रों के मूल सिद्धांतों से अवगत कराते हुए उन्हें आधुनिक जीवन में उतारने का मार्ग दिखाते हैं।

16. स्वामी मुकundananda जी

हालाँकि स्वामी मुकundananda जी मुख्य रूप से आध्यात्मिक गुरु हैं, लेकिन उनके भागवत कथा और भगवद् गीता के प्रवचन विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। उनकी शैली में वैदिक ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अद्भुत संयोजन है। वे अपनी कथाओं के माध्यम से जीवन में सफलता, सुख और आध्यात्मिक विकास का मार्ग बताते हैं।

17. पंडित रमेश भाई ओझा (रमेश भाई जी)

रमेश भाई ओझा जी गुजरात से जुड़े एक प्रसिद्ध कथा वाचक हैं। उनकी राम कथा और भागवत कथा दोनों ही अत्यंत लोकप्रिय हैं। उनका प्रवचन शैली में सरल गुजराती और हिंदी भाषा का प्रयोग होता है जो श्रोताओं को आसानी से समझ में आता है। वे दशकों से कथा वाचन की सेवा में लगे हुए हैं।

18. पंडित अजय पाठक जी

पंडित अजय पाठक जी भागवत कथा के क्षेत्र में एक जाने-माने नाम हैं। उनका प्रवचन शैली में शास्त्रीय ज्ञान की गहराई के साथ-साथ हास्य और व्यंग्य का भी प्रयोग होता है जो श्रोताओं को बाँधे रखता है। वे नियमित रूप से भारत के विभिन्न हिस्सों में कथा आयोजन करते हैं।

19. आचार्य प्रशांत जी

आचार्य प्रशांत जी एक आधुनिक दृष्टिकोण वाले आध्यात्मिक गुरु हैं। हालाँकि वे मुख्य रूप से उपनिषद् और गीता पर प्रवचन देते हैं, लेकिन उनके भागवत कथा संबंधी विचार भी गहराई से प्रभावित करते हैं। उनकी शैली में तर्क, दर्शन और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम है। वे युवाओं को विशेष रूप से प्रभावित करते हैं।

20. पंडit राधेश्याम जी

पंडit राधेश्याम जी एक पारंपरिक कथा वाचक हैं जो वृंदावन और मथुरा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उनका प्रवचन शुद्ध ब्रज भाषा और भाव में लिप्त होता है। वे श्री कृष्ण की रास लीला और बाल लीला का वर्णन करते समय श्रोताओं को ऐसा अनुभव कराते हैं मानो वे स्वयं वृंदावन में उपस्थित हों।

भागवत कथा सुनने के लाभ

भागवत कथा सुनना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक गहन आध्यात्मिक अनुभव है। इसके कई लाभ हैं:
मानसिक शांति: आज के तनावपूर्ण जीवन में भागवत कथा सुनने से मन को अपार शांति मिलती है। श्री कृष्ण की लीलाएँ सुनकर मन की उथल-पुथल शांत होती है।
नैतिक मूल्यों का विकास: भागवत पुराण में प्रह्लाद, ध्रुव, अंबरीष और अन्य भक्तों की कथाएँ हमें धैर्य, विश्वास और निष्ठा सिखाती हैं। ये कहानियाँ बच्चों और युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।
पारिवारिक सौहार्द: जब पूरा परिवार एक साथ बैठकर कथा सुनता है, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह परिवार के बीच प्रेम और समझ को बढ़ाता है।
आध्यात्मिक जागृति: भागवत कथा हमें यह समझने में मदद करती है कि जीवन का असली उद्देश्य क्या है। यह हमें भौतिक मोह-माया से ऊपर उठकर आध्यात्मिक विकास की ओर प्रेरित करती है।
सामाजिक एकता: कथा स्थल पर विभिन्न जाति, धर्म और वर्ग के लोग एक साथ बैठते हैं। यह सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है।

भागवत कथा वाचन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

कथा का समय: पारंपरिक रूप से भागवत कथा सात दिनों की होती है, लेकिन आजकल एक दिवसीय, तीन दिवसीय और नौ दिवसीय कथाएँ भी आयोजित की जाती हैं। समय की उपलब्धता के अनुसार श्रोता कथा का चयन कर सकते हैं।
कथा स्थल का महत्व: कथा का स्थान शुद्ध और पवित्र होना चाहिए। कई लोग अपने घरों में, मंदिरों में या सार्वजनिक स्थलों पर कथा का आयोजन करते हैं। स्थान की शुद्धता कथा के प्रभाव को बढ़ाती है।
श्रद्धा और विश्वास: कथा सुनते समय श्रद्धा और विश्वास का भाव अत्यंत आवश्यक है। बिना श्रद्धा के कथा सुनना उतना लाभदायक नहीं होता। श्रोता को पूर्ण मन से कथा में लीन होना चाहिए।
कथा वाचक का चयन: कथा वाचक का चयन करते समय उनकी शास्त्रीय ज्ञान, अनुभव और प्रवचन शैली का ध्यान रखना चाहिए। एक अच्छे कथा वाचक कथा को जीवंत बना देते हैं।
नियमितता: भागवत कथा का नियमित श्रवण मन को अधिक लाभ पहुँचाता है। वर्ष में कम से कम एक बार कथा सुनने का प्रयास करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: भागवत कथा कितने दिनों की होती है?
उत्तर: पारंपरिक रूप से भागवत कथा सात दिनों की होती है, जिसे भागवत सप्ताह भी कहा जाता है। हालाँकि, आजकल एक दिवसीय, तीन दिवसीय, नौ दिवसीय और एक माह तक की कथाएँ भी आयोजित की जाती हैं। समय और संसाधनों के अनुसार कथा की अवधि तय की जाती है।
प्रश्न 2: क्या महिलाएँ भी भागवत कथा का वाचन कर सकती हैं?
उत्तर: बिल्कुल। आज की तारीख में कई प्रतिष्ठित महिला कथा वाचक जैसे जया किशोरी जी, देवी चित्रलेखा जी, देवी कृष्णप्रिया जी और देवी भाग्यश्री जी सफलतापूर्वक भागवत कथा का वाचन कर रही हैं। भक्ति और ज्ञान किसी भी लिंग की परिधि में बँधा नहीं है।
प्रश्न 3: भागवत कथा सुनने से क्या लाभ होता है?
उत्तर: भागवत कथा सुनने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक जागृति, नैतिक मूल्यों का विकास और पारिवारिक सौहार्द बढ़ता है। यह जीवन के कठिन प्रश्नों के उत्तर खोजने में मदद करता है और मन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।
प्रश्न 4: कथा वाचक को क्या योग्यताएँ होनी चाहिए?
उत्तर: एक अच्छे कथा वाचक को शास्त्रों का गहन ज्ञान, स्पष्ट उच्चारण, भक्ति भाव, सामाजिक समझ और श्रोताओं को बाँधे रखने की क्षमता होनी चाहिए। उनका प्रवचन श्रद्धा और ज्ञान दोनों से परिपूर्ण होना चाहिए।
प्रश्न 5: क्या भागवत कथा ऑनलाइन भी सुनी जा सकती है?
उत्तर: हाँ, आज के डिजिटल युग में लगभग सभी प्रमुख कथा वाचकों की कथाएँ यूट्यूब, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। आप घर बैठे भी इन कथाओं का आनंद ले सकते हैं, हालाँकि सामूहिक रूप से कथा स्थल पर बैठकर सुनने का अपना एक अलग महत्व है।
प्रश्न 6: भागवत कथा और राम कथा में क्या अंतर है?
उत्तर: भागवत कथा मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं और श्रीमद् भागवत पुराण पर आधारित होती है, जबकि राम कथा भगवान श्री राम के जीवन और रामचरितमानस पर आधारित होती है। दोनों ही कथाएँ भक्ति और धर्म के मार्ग पर मार्गदर्शन करती हैं।

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निष्कर्ष

भारत की धरती पर भागवत कथा वाचन की परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी यह उतनी ही जीवंत है। चाहे वे अनुभवी संत हों या युवा कथा वाचक, सभी अपनी-अपनी शैली में श्रीमद् भागवत के अमृत को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। मुरारी बापू जी की गहन शास्त्रीय समझ, देवकीनंदन ठाकुर जी की भक्तिमय वाणी, आचार्य शिवम मिश्रा जी महाराज की सच्ची भक्ति का संदेश, जया किशोरी जी की प्रेरणादायक शैली और देवी चित्रलेखा जी की बालिका काल से प्रारंभ हुई साधना — ये सभी इस बात का प्रमाण हैं कि भक्ति की भाषा कभी पुरानी नहीं होती।
इन 20 कथा वाचकों की सूची केवल एक नामावली नहीं है, बल्कि यह उन आध्यात्मिक ध्वजवाहकों का सम्मान है जिन्होंने अपने जीवन को धर्म और समाज सेवा में समर्पित कर दिया है। यदि आप जीवन में कुछ क्षण शांति, प्रेरणा और आध्यात्मिक ऊर्जा की खोज में हैं, तो इन कथा वाचकों की कथा अवश्य सुनें। भागवत कथा का एक-एक शब्द मानो अमृत की बूँद है जो मन को पवित्र करती है और आत्मा को उड़ान देती है।
🙏 पूज्य गुरुदेव आचार्य शिवम् मिश्र जी महाराज 🙏
श्रीमद्भागवत कथा एवं आध्यात्मिक प्रवचन के चयनित वीडियो
श्रीमद्भागवत कथा एवं प्रवचन – वीडियो 1
कथा प्रवचन – वीडियो 2
कथा प्रवचन – वीडियो 3
कथा प्रवचन – वीडियो 4
कथा प्रवचन – वीडियो 5
कथा प्रवचन – वीडियो 6
कथा प्रवचन – वीडियो 7
कथा प्रवचन – वीडियो 8
कथा प्रवचन – वीडियो 9
कथा प्रवचन – वीडियो 10
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