F bhagwat katha notes pdf श्रीमद्भागवत कथा नोट्स - bhagwat kathanak
bhagwat katha notes pdf श्रीमद्भागवत कथा नोट्स

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श्रीमद्भागवत महापुराण कथा - Part 1

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मंगलाचरण एवं महापुराण की महिमा

🙏 श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान में आपका स्वागत है 🙏 परम भगवद्भक्तों और कथा अनुरागियों! 'श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान' की ओर से आप सभी का इस पावन श्रीमद्भागवत कथा रसामृत में हार्दिक स्वागत है। यदि आप भी व्यास पीठ पर बैठकर कथा वाचन की दिव्य कला सीखना चाहते हैं, भगवान की लीलाओं का गूढ़ रहस्य समझना चाहते हैं, या इस परम पवित्र भागवत कथा के प्रामाणिक लिखित नोट्स (Katha Notes) प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारे संस्थान से अवश्य जुड़ें। आइए, अपने हृदय को प्रभु के श्रीचरणों में समर्पित कर कथा के प्रथम भाग में प्रवेश करें।

(कथा श्रवण या वाचन से पूर्व अपने इष्ट, गुरुदेव और विघ्नहर्ता का स्मरण अत्यंत आवश्यक है। इससे अंतःकरण शुद्ध होता है और कथा का श्रवण सफल होता है। आइए, पूरी श्रद्धा के साथ भगवान का ध्यान करें:)

॥ गुरु एवं गणेश वंदना ॥

अस्मद गुरुभ्यो नमः, अस्मत परम गुरुभ्यो नमः, अस्मत सर्व गुरुभ्यो नमः। श्री राधा कृष्णाभ्याम् नमः, श्रीमते रामानुजाय नमः।

लम्बोदरं परम सुन्दर एकदन्तं, पीताम्बरं त्रिनयनं परमंपवित्रम्।

उद्यद्धिवाकर निभोज्ज्वल कान्ति कान्तं, विघ्नेश्वरं सकल विघ्नहरं नमामि।।

अखंड मंडलाकारं व्याप्तम येन चराचरम।

तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः।।

॥ श्री व्यास एवं सरस्वती वंदना ॥

नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।

देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्।।

॥ श्री कृष्ण वंदना ॥

जयतु जयतु देवो देवकीनन्दनोऽयं, जयतु जयतु कृष्णो वृष्णिवंशप्रदीपः।

जयतु जयतु मेघश्यामलः कोमलाङ्गः, जयतु जयतु पृथ्वीभारनाशो मुकुन्दः॥

बर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कर्णिकारं, बिभ्रद् वासः कनककपिशं वैजयन्तीं च मालाम्।

रन्ध्रान् वेणोरधरसुधया पूरयन गोपवृन्दैः, वृन्दारण्यं स्वपदरमणं प्राविशद् गीतकीर्तिः।।

॥ श्री राम वंदना ॥

श्रीराम राम रघुनंदन राम राम, श्री राम भरताग्रज राम राम।

श्रीराम रण कर्कश राम राम, श्रीराम राम शरणम् भव राम राम।।

श्रीरामचंद्रचरणौ मनसा स्मरामि, श्रीरामचंद्रचरणौ वचसा गृणामि।

श्रीरामचंद्रचरणौ शिरसा नमामि, श्रीरामचंद्रचरणौ शरणं प्रपद्ये।।

माता रामो मत्पिता रामचंद्रः, स्वामी रामो मत सखा रामचंद्रः।

सर्वस्वं मे रामचंद्रो दयालु, र्नान्य जाने नैव जाने न जाने।।

रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे, रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नम:।।

॥ श्री शिव एवं हनुमान वंदना ॥

ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं,

रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृग वराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।

पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं,

विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।

अंजना नंदनं वीरं जानकी शोक नाशनं!

कपीश मक्ष हंतारं वंदे लंका भयंकरं॥

॥ भगवत कृपा एवं वंदना ॥

मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं।

यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्॥

भक्त भक्ति भगवंत गुरु चतुर नाम बपु एक।

इनके पद वंदन कीएँ नासत विघ्न अनेक।।

श्रीमद्भागवत महापुराण की जय: भूमिका (व्यास पीठ से परम श्रद्धेय वक्ता जब कथा का आरंभ करते हैं, तो सबसे पहले अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक, अचिंत्य कल्याण गुणगण निधान, सर्वेश्वर, अकारण करुणा सागर भगवान श्रीकृष्ण और श्री राधारानी के युगल चरणों में प्रणाम निवेदित करते हैं।)

समुपस्थित भगवत् भक्त, भागवत कथा अनुरागी सज्जनों, भक्तिमयी मातृशक्ति एवं भगिनी-बांधवों—

सियाराममय सब जग जानी, करहुं प्रणाम जोरि जुग पानी।

भागवत क्या है?

  • भगवतः इदं स्वरूपं भागवतम्: जो भगवान का स्वरूप है, उसे 'भागवत' कहते हैं।

  • तेनेयम् वाड़मयि मूर्तिः प्रत्यक्षः कृष्ण एवहि: यह श्रीमद्भागवत भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्यक्ष शब्दमयी मूर्ति (वाङ्मयी मूर्ति) है।

  • भगवतः प्रोक्तं भागवतम्: भगवान ने जिसका उपदेश किया है, उसे 'भागवत' कहते हैं।

  • भगवतः चरितं यस्मिन् तत् भागवतम्: जिसमें भगवान के परम पवित्र चरित्र का वर्णन किया गया है।

  • भगवत्याः श्रीराधायाः गुप्तचरितं यस्मिन् तत् भागवतम्: जिसमें श्री राधारानी के गुप्त चरित्र का वर्णन है।

  • भगवतोः श्रीराधा-कृष्णयोः इदं स्वरूपं भागवतम्: जो श्री राधा-कृष्ण के युगल स्वरूप का पावन चरित्र है।

  • भक्ति-ज्ञान-वैराग्याणां तत्त्वं यस्मिन् तत् भागवतम्: जिसमें भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के तत्त्व का वर्णन किया गया है।

'भागवत' शब्द के चार अक्षरों का गूढ़ रहस्य:

भाष्यते सर्ववेदेषु, गीयते नारदादिभिः।

वदन्ति त्रिषु लोकेषु, तरन्ति भवसागरम्।।

भा = भाष्यते सर्ववेदेषु (जिससे समस्त देवता प्रकाशित होते हैं / जो कीर्तिवाचक है) ग = गीयते नारदादिभिः (जिसका गान नारदादि ऋषि करते हैं / जो ज्ञानवाचक है) व = वदन्ति त्रिषु लोकेषु (जो तीनों लोकों में विख्यात है / जो वैराग्यदायक है) त = तरन्ति भवसागरम् (जो संसार रूपी भवसागर से पार उतारने वाली है)

महापुराण के लक्षण:

सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशो मन्वंतराणि च।

वंशानुचरितं चैव पुराणं पञ्चलक्षणम्॥

साधारण पुराणों में पाँच लक्षण होते हैं (सूक्ष्म सृष्टि, स्थूल सृष्टि, सूर्य-चंद्र वंश, मन्वंतर, और भगवान के भक्तों के वंश का वर्णन)। परंतु श्रीमद्भागवत में दस (दश) लक्षण हैं, इसीलिए इसे 'महापुराण' कहा जाता है।

श्रीमद्भागवत के प्रारंभ में इसके 'महात्म्य' (महिमा) का वर्णन है, क्योंकि "महात्म्यज्ञानपूर्वकं श्रद्धा भवति" अर्थात् महिमा को जानने के बाद ही सच्ची श्रद्धा उत्पन्न होती है। पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी भी कहते हैं—

जाने बिनु न होत प्रीती, बिनु प्रीती होत नहीं प्रीती।

यह महात्म्य पद्मपुराण से लिया गया है, जिसमें कुल 6 अध्याय हैं।

श्रीमद्भागवत महात्म्य आइए, महात्म्य के इन दिव्य श्लोकों के साथ भगवान का स्मरण करें:

सच्चिदानन्दरूपाय विश्वोत्पत्यादि हेतवे।

तापत्रयविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नुमः।। (मा•1-1)

भावार्थ: जो सत्-स्वरूप, चित्-स्वरूप और आनंद-स्वरूप हैं; जो विश्व की उत्पत्ति, पालन और संहार के एकमात्र कारण हैं; जो हमारे तीनों तापों (आध्यात्मिक- मानसिक ताप, आधिदैविक- देव प्रकोप, और आधिभौतिक- जीवों द्वारा कष्ट) का नाश करने वाले हैं— ऐसे श्री राधारानी सहित भगवान श्रीकृष्ण को हम बारंबार नमस्कार करते हैं।

यं प्रव्रजन्तमनुपेतमपेतकृत्यं द्वैपायनो विरहकातर आजुहाव।

पुत्रेति तन्मयतया तरवोऽभिनेदुस्तं सर्वभूतह्रदयं मुनिमानतोऽस्मि।। (मा•1-2)

भावार्थ: जिस समय श्री शुकदेव जी का उपनयन संस्कार भी नहीं हुआ था और वे वैराग्य धारण कर वन की ओर चल पड़े, तब उनके पिता वेदव्यास जी पुत्र-मोह से कातर होकर "हे बेटा! रुक जाओ!" पुकारने लगे। उस समय वृक्षों ने तन्मय होकर उत्तर दिया— "हे वेदव्यास जी! आप ज्ञानी होकर भी मोह कर रहे हैं। हमें देखिए, हममें कितने फल लगते हैं और नष्ट हो जाते हैं, पर हम दुखी नहीं होते। आप भी दुख त्याग दें, क्योंकि आत्मरूप से शुकदेव जी हम सबके हृदय में विराजमान हैं।" ऐसे सर्वभूतहृदय श्री शुकदेव जी को मैं प्रणाम करता हूँ।

[क्रमशः... अगले भाग (Part 2) में हम कथा के आगे के प्रसंगों का आनंद लेंगे।]

🙏 श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान से जुड़ें 🙏 प्रिय पाठकों, यदि आपके हृदय में भी भगवान की इस वाङ्मयी मूर्ति को गहराई से जानने की लालसा जाग्रत हुई है, तो 'श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान' आपका स्वागत करता है। क्या आप एक सफल कथावाचक बनना चाहते हैं? क्या आपको कथा वाचन की विधियाँ सीखनी हैं या ऐसे ही उत्तम 'कथा नोट्स' प्राप्त करने हैं? तो आज ही हमारे संस्थान 'श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान' से संपर्क करें। हमारा उद्देश्य धर्म की इस पावन गंगा को जन-जन तक पहुँचाना और समाज को श्रेष्ठ मार्गदर्शक प्रदान करना है।

॥ जय श्री राधे! जय श्री कृष्ण! ॥

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