F कथा वाचक बनने के लिए नोट्स katha vachak banne ke liye notes - bhagwat kathanak
कथा वाचक बनने के लिए नोट्स katha vachak banne ke liye notes

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कथा वाचक बनने के लिए नोट्स katha vachak banne ke liye notes

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श्रीमद्भागवत महापुराण कथा - Part 19



द्रौपदी का भीष्म-शिविर गमन, 'अखंड सौभाग्यवती' आशीर्वाद, श्रीकृष्ण का रथ-चक्र धारण एवं पितामह भीष्म का परमधाम गमन

🙏 श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान में आपका स्वागत है 🙏

परम भगवद्भक्तों एवं कथा अनुरागियों! 'श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान' की ओर से श्रीमद्भागवत कथा रसामृत के नवदश भाग (Part 19) में आप सभी का हार्दिक अभिनंदन है। यदि आप व्यास पीठ से कथा वाचन की प्रामाणिक एवं मधुर शैली सीखना चाहते हैं, श्लोकों व पदों की विशुद्ध व्याख्या समझना चाहते हैं तथा 'कथा नोट्स' (Katha Notes) प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारे संस्थान से अवश्य जुड़ें। आइए, प्रथम स्कंध के नवम अध्याय के उत्तरार्ध में वर्णित द्रौपदी की रक्षा, पितामह भीष्म की भीषण प्रतिज्ञा, भगवान श्रीकृष्ण के भक्तवत्सल स्वरूप और पितामह के परमधाम गमन का भावपूर्ण रसास्वादन करते हैं।

🌸 भीष्म की भीष्म-प्रतिज्ञा एवं श्रीकृष्ण की अद्वैत लीला 🌸

जब पितामह भीष्म ने दुर्योधन के ताने सुनकर प्रतिज्ञा की कि "कल पांडव जीवित रणभूमि से नहीं लौटेंगे", तो दुर्योधन अत्यंत प्रसन्न हुआ। पितामह ने दुर्योधन से कहा— "यदि तुम्हें अपनी विजय सुनिश्चित करनी है, तो कल ब्रह्ममुहूर्त में अपनी पत्नी भानुमति को आशीर्वाद लेने मेरे पास भेज देना।"

भगवान श्रीकृष्ण तो भक्त-रक्षक हैं। जब उन्हें यह ज्ञात हुआ, तो वे रात्रि में ही पांडवों के शिविर पहुँचे। धर्मराज युधिष्ठिर निश्चिंत होकर ध्यान में लीन थे, भीमसेन मजे से भोजन कर रहे थे और माता द्रौपदी बेफिक्र सो रही थीं। पांडवों का अनन्य विश्वास था:

"जिनके रक्षक हैं घनश्याम, उन्हें कोई मार नहीं सकता।

प्रभु दीनबंधु का दास, कभी हार नहीं सकता॥"

🌸 द्रौपदी का भीष्म-शिविर गमन एवं 'अखंड सौभाग्यवती' आशीर्वाद 🌸

भगवान श्रीकृष्ण ने रात्रि के अंतिम पहर में द्रौपदी को जगाया और कहा— "कृष्णा! तुम सो रही हो, वहाँ पितामह भीष्म ने तुम्हारे सौभाग्य को मिटाने की प्रतिज्ञा कर ली है।"

द्रौपदी बोली— "प्रभु! जब आप मेरे साथ हैं, तो मुझे चिंता कैसी?" भगवान श्रीकृष्ण द्रौपदी का हाथ पकड़कर पितामह भीष्म के शिविर की ओर चले। द्रौपदी की जूतियाँ चलने पर आवाज़ कर रही थीं, अतः भेद न खुल जाए, इसलिए करुणासिंधु श्रीकृष्ण ने उन जूतियों को स्वयं उतारकर अपनी बगल में दबा लिया।

शिविर के बाहर पहुँचकर भगवान ने कहा— "कृष्णा! अंदर शांत रहना और जब तक पितामह तीन बार आशीर्वाद न दे दें, उठना मत।"

संध्यावंदन से निवृत्त हो रहे पितामह भीष्म के चरणों में द्रौपदी ने अपना मस्तक रख दिया। कम प्रकाश होने के कारण पितामह ने समझा कि दुर्योधन की पत्नी भानुमति आई है। उन्होंने आशीर्वाद दिया:

"सौभाग्यवती भव! सौभाग्यवती भव! अखंड सौभाग्यवती भव!"

तीन बार आशीर्वाद मिलने पर जब द्रौपदी ने घूँघट उठाया, तो पितामह भीष्म चकित रह गए और पूछा— "द्रौपदी! तुम यहाँ किसके साथ आई हो?" द्रौपदी ने कहा— "अपनी दासी के साथ।"

जब पितामह भीष्म शिविर के बाहर आए, तो देखा कि सिर पर घूँघट और बगल में द्रौपदी की जूतियाँ दबाए साक्षात भगवान श्रीकृष्ण खड़े हैं! भीष्म जी नतमस्तक होकर बोले— "अरे कन्हैया! जिसकी रक्षा स्वयं तुम कर रहे हो, उसका संसार क्या बिगाड़ सकता है? किंतु आज तुमने छल से मेरी प्रतिज्ञा भंग की है, अतः अब मेरी भी भीषण प्रतिज्ञा सुनो..."


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🌸 प्रतिज्ञा-द्वंद्व: भीष्म की जिद एवं श्रीकृष्ण का उत्तर 🌸

पितामह भीष्म ने हुंकार भरते हुए अपनी प्रतिज्ञा ली:

आज यदि हरिहिं न शस्त्र उठाऊँ।

तो लाजौं गंगा जननी कौ, शान्तनु सुत ना कहावौं॥

कुरुक्षेत्र के मैदान में यदि आज मैंने श्रीकृष्ण के हाथों में शस्त्र न उठवा दिया, तो मैं अपनी माता गंगा का पुत्र नहीं कहलाऊँगा!

भगवान श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा:

भाखत कहां हो, ऐसी धारणा ना राखो चित्त;

प्रण के विरुद्ध पक्षपात ना विचारिहौं।

बनो हूँ सारथी, रथ हाँकन मेरो काम;

न्याय के विरुद्ध युद्ध को नियम ना विसारिहौं।

जो मैं एक बाप को सबल सपूत हूँ, मैं काहूँ भाँति अस्त्र कर ना धारिहौं॥

🌸 युद्ध-भूमि में भक्तवत्सल लीला: रथ-चक्र धारण 🌸

महाभारत युद्ध में भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की ऐसी प्रलयंकारी बौछार की कि दसों दिशाओं में केवल भीष्म और उनके बाण दिखाई देने लगे। अर्जुन विह्वल होकर पुकार उठे— "प्रभु! हे कृष्ण! हे माधव! रक्षा करो, रक्षा करो!"

अपने भक्त अर्जुन की वेदना और पितामह भीष्म की अनन्य भक्ति देखकर भगवान श्रीकृष्ण अपनी प्रतिज्ञा ("मैं अस्त्र नहीं उठाऊँगा") भूल गए! वे रथ से कूद पड़े, टूटे हुए रथ का पहिया (चक्र) अपने हाथ में उठाया और पीतांबर हवा में फहराते हुए पितामह भीष्म को मारने के लिए उनकी ओर दौड़ पड़े।

पितामह भीष्म ने तुरंत अपना धनुष-बाण त्याग दिया, हाथ जोड़कर प्रणाम किया और मुस्कुराते हुए बोले— "कन्हैया! पहले यह बताओ, तुम्हारे कितने बाप हैं? एक बाप की संतान तो अपनी प्रतिज्ञा से कभी पीछे नहीं हटती!"

भगवान श्रीकृष्ण ने गद्गद होकर अद्भुत उत्तर दिया:

भोले घनश्याम! सुनो भीष्म भगतराज, मोहे जन्म देने वाले जग में अपार हैं।

सिंधु, खंभ, धरणि, पाषाण से प्रकट होत, कहां लव बखानौं मेरे अमित अवतार हैं।

कोऊ कहे वसुदेव-देवकी को लाल हौं, कोऊ कहे नंद-यशोदा को कुमार हौं।

जाको एक बाप बचावै निज लाज, सोई मेरी; कौन लाज? मेरे बाप को हजार हैं!

भीष्म पितामह प्रभु के इस अलौकिक प्रेम और भक्तवत्सलता को देखकर अश्रुपूरित हो गए। उन्होंने अंतःकरण में भगवान की ब्रज-लीला और रास-लीला का स्मरण करते हुए अपने प्राणों को श्रीकृष्ण के चरणकमलों में सदा-सदा के लिए विलीन कर दिया। दसों दिशाओं में जय-जयकार होने लगी, आकाश से पुष्प-वर्षा होने लगी।

🌸 🎵 प्रसिद्ध संकीर्तन: इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले 🎵 🌸

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले,

गोविन्द नाम लेकर प्राण तन से निकले ॥

श्री गंगा जी का तट हो, यमुना का वंशी वट हो,

मेरा साँवरा निकट हो - जब प्राण तन से निकले...

श्री वृन्दावन स्थल हो, मेरे मुख में तुलसी दल हो,

विष्णु चरण का जल हो - जब प्राण तन से निकले...

सम्मुख साँवरा खड़ा हो, वंशी का स्वर भरा हो,

तिरछा चरण धरा हो - जब प्राण तन से निकले...

मेरे प्राण निकले सुख से, प्रभु का नाम निकले मुख से,

बच जाऊँ घोर दुख से - जब प्राण तन से निकले...

उस वक्त जल्दी आना, नहीं श्याम भूल जाना,

राधे को संग में लाना - जब प्राण तन से निकले...

यह नेक सी अरज है, मानो तो क्या हरज है,

कुछ आपका फरज है - जब प्राण तन से निकले...

[क्रमशः... अगले भाग (Part 20) में हम पितामह भीष्म के अंतिम संस्कार के पश्चात् पांडवों का हस्तिनापुर आगमन, राजा युधिष्ठिर का धर्मपूर्वक राज्याभिषेक एवं भगवान श्रीकृष्ण के द्वारका प्रस्थान का अति पावन प्रसंग सुनेंगे।]

🙏 श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान से जुड़ें 🙏

हे कथा रसिकों! श्रीमद्भागवत का यह दिव्य प्रसंग सिद्ध करता है कि भगवान अपने नियमों को तोड़ सकते हैं, किंतु अपने अनन्य भक्तों के मान और प्रतिज्ञा की रक्षा सदैव करते हैं। यदि आप भी व्यास पीठ से प्रामाणिक कथा वाचन की शैली सीखना चाहते हैं, श्लोकों व पदों की व्याख्या तथा 'हस्तलिखित कथा नोट्स' (Katha Notes) प्राप्त करना चाहते हैं, तो 'श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान' आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए सदैव तत्पर है।

  • 🚩 व्यास पीठ एवं कथा वाचन प्रशिक्षण (Katha Training)

  • 🚩 श्रीमद्भागवत महापुराण के सरल, प्रामाणिक एवं क्रमबद्ध नोट्स

  • 🚩 वैदिक श्लोक, मंगलाचरण एवं संकीर्तन गायन प्रशिक्षण

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कथा वाचक बनने के लिए नोट्स katha vachak banne ke liye notes

॥ जय श्री राधे! जय श्री कृष्ण! ॥

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