F हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। hare krishna hare krishna - bhagwat kathanak
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।। 
सब वेदों का ज्ञान यही है योग यज्ञ जप ध्यान यही है। 
सन्तों का उपदेश यही है. जीवन का उददेश्य यही है।। 
भक्तों का धन धाम यही है, सख सम्पत्ति विश्राम यहा है। 
सब दुःखों की जड़ी यही है, सञ्जीवनि सुखभरी यही है।। 
शंकर का आधार यही है. नारद की झंकार यही है। 
सब विद्या का सार यही है, सर्व शास्त्र परचार यही है।।
 सब साधन का अर्थ यही है, सबका परम परुषार्थ यही है। 
निर्धन का धन प्राण यही है, निर्बल का बल मान यही है।। 
गोपियों का सपन्थ यही है, प्रेमियों का सद्ग्रन्थ यही है।
 कर्म और सत्धर्म यही है, सदग्रन्थों का मर्म यही है।। 
भागवत का व्याख्यान यही है, गीता का सदज्ञान यही है। 
मोक्ष-धर्म-धन काम यही है, 'श्याम' का कृष्ण औ राम यही है।।

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Bhagwat Kathanak            Katha Hindi

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