द्रुपदो द्रौपदेयाश्च / drupdo dropdeyashcha
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते।
सौभद्रश्च महाबाहुः शंखान्दध्मुः पृथक्पृथक्॥१-१८॥
-: हिंदी भावार्थ :-
द्रुपद एवं द्रौपदी के पांचों पुत्र और बड़ी भुजाओं वाले सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु ने, पूरी तरह से अपने-अपने शंख बजाए॥