नाहं विशंके सुरराजवज्रा-/naham vishanke
नाहं विशंके सुरराजवज्रा-
न्न त्र्यक्षशूलान्न यमस्य दण्डात |
नाग्न्यर्कसोमानिलवित्तपास्त्रा-
च्छङ्के भृशं ब्रह्मकुलावमानात ||
( 5.10.17 )
मैं इंद्र के वज्र शिव के त्रिशूल यमराज के दंड और अग्नि सोम आदि देवताओं के अस्त्र शस्त्रों से नहीं डरता परंतु ब्राम्हण कुल के अपमान से मुझे बहुत डर लगता है,,,,
न्न त्र्यक्षशूलान्न यमस्य दण्डात |
नाग्न्यर्कसोमानिलवित्तपास्त्रा-
च्छङ्के भृशं ब्रह्मकुलावमानात ||
( 5.10.17 )
मैं इंद्र के वज्र शिव के त्रिशूल यमराज के दंड और अग्नि सोम आदि देवताओं के अस्त्र शस्त्रों से नहीं डरता परंतु ब्राम्हण कुल के अपमान से मुझे बहुत डर लगता है,,,,
नाहं विशंके सुरराजवज्रा-/naham vishanke
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