त्वयोदितं व्यक्तमपि प्रलब्धं /tvayoditam vyaktamapi
त्वयोदितं व्यक्तमपि प्रलब्धं
भर्तुः समे स्याद्यदि वीर भारः |
गन्तुर्यदि स्यादधिगम्यमध्वा
पीवेत राशौ न विदां प्रवादः ||
( 5.10.9 )
राजन तुम्हारा कहना सत्य है परंतु यदि भार नाम की चीज है तो वह ढोने वाले के लिए है, रास्ता है तो चलने वाले के लिए है ,मोटा होना पतला होना उत्पन्न होना मरना यह सब शरीर के धर्म है, आत्मा का इनसे कोई संबंध नहीं होता |
त्वयोदितं व्यक्तमपि प्रलब्धं /tvayoditam vyaktamapi
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