F त्वयोदितं व्यक्तमपि प्रलब्धं /tvayoditam vyaktamapi - bhagwat kathanak
त्वयोदितं व्यक्तमपि प्रलब्धं /tvayoditam vyaktamapi

bhagwat katha sikhe

त्वयोदितं व्यक्तमपि प्रलब्धं /tvayoditam vyaktamapi

त्वयोदितं व्यक्तमपि प्रलब्धं /tvayoditam vyaktamapi

 त्वयोदितं व्यक्तमपि प्रलब्धं /tvayoditam vyaktamapi 


त्वयोदितं व्यक्तमपि प्रलब्धं
        भर्तुः समे स्याद्यदि वीर भारः |
गन्तुर्यदि स्यादधिगम्यमध्वा
        पीवेत राशौ न विदां प्रवादः ||
( 5.10.9 )
 राजन तुम्हारा कहना सत्य है परंतु यदि भार नाम की चीज है तो वह ढोने वाले के लिए है, रास्ता है तो चलने वाले के लिए है ,मोटा होना पतला होना उत्पन्न होना मरना यह सब शरीर के धर्म है, आत्मा का  इनसे कोई संबंध नहीं होता |

 त्वयोदितं व्यक्तमपि प्रलब्धं /tvayoditam vyaktamapi 


 त्वयोदितं व्यक्तमपि प्रलब्धं /tvayoditam vyaktamapi 


Ads Atas Artikel

Ads Center 1

Ads Center 2

Ads Center 3