F पतितः स्खलितो भग्नः/patitah skhalito bhagnah - bhagwat kathanak
पतितः स्खलितो भग्नः/patitah skhalito bhagnah

bhagwat katha sikhe

पतितः स्खलितो भग्नः/patitah skhalito bhagnah

पतितः स्खलितो भग्नः/patitah skhalito bhagnah

 पतितः स्खलितो भग्नः/patitah skhalito bhagnah


पतितः स्खलितो भग्नः सन्दष्टस्तप्त आहतः |
हरिरित्यवशेनाहं   पुमान्नार्ह्रति   यातनाम्  ||

गिरते समय अंग भंग होने पर और सर्प अदि के डसने पर भी कोई विवसता पूर्वक भगवान का नाम ले लेता है तो वह यम यात्रा का पात्र नहीं होता , जैसे अग्नि का स्पर्श कोई जानकार करें अथवा अनजान में करें अग्नि उसे जला देती है उसी प्रकार भगवान का नाम कोई जानकर अथवा अनजान मे ले पवित्र हो जाता है |


 पतितः स्खलितो भग्नः/patitah skhalito bhagnah


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