पतितः स्खलितो भग्नः/patitah skhalito bhagnah
गिरते समय अंग भंग होने पर और सर्प अदि के डसने पर भी कोई विवसता पूर्वक भगवान का नाम ले लेता है तो वह यम यात्रा का पात्र नहीं होता , जैसे अग्नि का स्पर्श कोई जानकार करें अथवा अनजान में करें अग्नि उसे जला देती है उसी प्रकार भगवान का नाम कोई जानकर अथवा अनजान मे ले पवित्र हो जाता है |
पतितः स्खलितो भग्नः/patitah skhalito bhagnah
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