जिह्वा न वक्ति भगवद् /jihva na vakti bhagavad
जिह्वा न वक्ति भगवद् गुणनामधेयं |
चेतश्च न स्मरति तच्चरणारविन्दम् |
कृष्णाय नो नमति यच्छिर एकदापि
तानानयध्यमसतो कृतविष्णुकृत्यान् ||
( 6.3.29 )
परंतु जिनकी जिह्वा सदा बकवाद तो करती है परंतु भगवान के मंगलमय नामों का उच्चारण नहीं करती जिनका चित्त संसार में तो रचा बसा रहता है लेकिन भगवान के निर्मल नामो तथा निर्मल चरण अरविंदो का मनन नहीं करता जिनका सिर बड़े-बड़े धनाढ्य के सामने तो झुकता है परंतु भगवान के सामने संत महात्मा गुरुजनों के सामने नहीं झुकता ऐसे पापियों को तुम मेरे पास ले आना बे दंडनीय है यम यातना के पात्र हैं |
जिह्वा न वक्ति भगवद् /jihva na vakti bhagavad
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