F अजां मेकां लोहित /ajam mekam lohit - bhagwat kathanak
अजां मेकां लोहित /ajam mekam lohit

bhagwat katha sikhe

अजां मेकां लोहित /ajam mekam lohit

अजां मेकां लोहित /ajam mekam lohit

 अजां मेकां लोहित /ajam mekam lohit


अजां मेकां लोहित शुक्ल कृष्णां |
बहवी प्रजाः सृज माना सरूपा: ||
एक माया ही के सत्व रज और तम यह तीन रूप हैं और वह इन्हीं के द्वारा अपने समान अनेकों प्रकार की सृष्टि करती है , परमात्मा ही व्यभिचारणी स्त्री माया का पति है मायावती भगवान |

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