धनानि जीवनंच्चैव /Dhanāni jīvanam chaiva
देवताओं मैं तुम्हारे धर्म की परीक्षा ले रहा था मुझे अपने शरीर से कोई मोह नहीं है क्योंकि धन और जीवन को परमार्थ में लगा देना चाहिए क्योंकि ना चाहे तो भी एक न एक दिन इनका विनाश हो जाना है ,ऐसा कह दधीचि ऋषि ने भगवान का स्मरण करके अपने शरीर का त्याग कर दिया |
धनानि जीवनंच्चैव /Dhanāni jīvanam chaiva
- आप के लिए यह विभिन्न सामग्री उपलब्ध है-
भागवत कथा , राम कथा , गीता , पूजन संग्रह , कहानी संग्रह , दृष्टान्त संग्रह , स्तोत्र संग्रह , भजन संग्रह , धार्मिक प्रवचन , चालीसा संग्रह , kathahindi.com
आप हमारे whatsapp ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें- click here
हमारे YouTube चैनल को सब्स्क्राइब करने के लिए क्लिक करें- click hear
