न कुर्यात्कर्हिचित्सख्यं /na kuryat karhichita sakhyam
न कुर्यात्कर्हिचित्सख्यं मनसि ह्यनवस्थिते |
यद्विश्रम्भाच्चिराच्चीर्णं चस्कन्द तप ऐश्वरम् ||
( 5/6/3 )
परीक्षित तुम्हारा कहना सत्य है परंतु चालाक बहेलिया भी अपने पकड़े हुए मृग पर विश्वास नहीं करता ऐसे ही कभी भी अपने चंचल चित्त पर विश्वास नहीं करना चाहिए | इसी चित्त पर विश्वास करने के कारण मोहिनी के रूप में फंसकर भगवान शंकर का चिरकाल का तप खंडित हो गया था |
न कुर्यात्कर्हिचित्सख्यं /na kuryat karhichita sakhyam
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